vashikaran upay

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वशीकरण से छुटकारा, वशीकरण से मुक्ति, वशीकरण हटाने के उपाय – वशीकरण या सम्मोहन को खतम करने से पहले जरूरी है की आप जान ले की आखिर वशीकरण है क्या!! वशीकरण एक ऐसी विद्या है, जिसके प्रयोग से एक इंसान किसी दूसरे इंसान को अपने वश मे करने की कोशिश करता है। ऐसा करके वो दूसरे वाले के मन-बुद्धि पर नियंत्रण करता है, ताकि उसे अपने अनुसार चला सके, वो अपने मन की करवा सके। कोई किसिकों अपनी ओर सम्मोहन द्वारा खिचना चाहता है क्यूकी वो उससे प्यार करता है, तो कोई वशीकरण द्वारा अपने दुश्मन पर कंट्रोल रखना चाहता है, या कोई अपने बॉस पर कंट्रोल रखना चाहता है, तो कोई टोटके व तंत्र-मंत्र द्वारा अपने घर को बुरी नज़र से बचाना चाहता है।  इसी तरह इंसान की जरूरत ही उसे बताती है की उसे आखिर इस विद्या का इस्तेमाल कब, कैसे और किस हालात मे करना है

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बॉस वशीकरण की सहायता से आप बहुत ही आसानी से अपने बॉस का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं और नौकरी में उन्नति और वेतन, छुट्टी, बोनस आदि में विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं. बॉस का सहयोग और समर्थन आपको अपनी नौकरी में उच्चपद प्राप्त करने में बहुत उपयोगी होता है. आप यहाँ दिए गए बॉस वशीकरण उपायों से अपने काम आसन कर सकते हैं|

पत्नी को वश में करने के टोटके, पत्नी को वश में करने का तरीका, पत्नी को वश में करने के वशीकरण मंत्र- घर एक ऐसा स्थान है जहां इंसान सुकून के पल तलाशता है। दिन भर की भाग-दौड़ के बाद परिवार के साथ तनाव मुक्त होकर जीना चाहता है। यदि ऐसा हो, तो जीवन की तमाम दुश्वारियां कोई भी झेल सकता है। परंतु हकीकत में ऐसा होता नहीं है। कहीं पति ऐसा आतातायी स्वभाव का होता है कि घर हिटलर का नाजी कैंप बन जाता है, दूसरी तरफ कुछ स्त्रियां ऐसी कर्कशा होती हैं कि कलह का एक भी मौका नहीं छोड़तीं। पति हर सुख सुविधा का इंतजाम कर दे, किसी बात का विरोध न करे, फिर भी वह उसे कोसने से बाज नहीं आती। शयन कक्ष यदि युद्ध का मैदान बन जाए तो वैवाहिक सुख की कल्पना भला कौन कर सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए यदि सम्मोहन विद्या का सहारा लिया जाए तो उसे नैतिक दृष्टि से भी गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यहां उद्देश्य पारिवारिक सुख-शांति है।

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प्रथम बात तो उन्होंने यह कही है कि आप दूसरों की परिस्थितियों, उनकी समस्याओं, उनकी परेशानियों में सच्चे हृदय से अपनी रुचि दिखावें। देखिए इस संसार में प्रत्येक के सर पर अपनी निजी ही इतनी कठिनाइयाँ, परेशानियाँ तथा आवश्यकतायें है कि वह उन्हीं से उबर नहीं पाता, तब उसे दूसरे की परेशानियों को सुनने और दूर करने का कहाँ से अवकाश मिलेगा तथा रुचि होगी आप यदि अपना रोना किसी के सामने रोने न बैठ जायं, वरन् उसकी राम कहानी को ध्यान से सुनें, उसके प्रति अपनी सहानुभूति का प्रदर्शन करें, तो वह आपके प्रति आकर्षित होगा, आपका मित्र हो जायगा और तब वह केवल आपको पसन्द ही न करेगा वरन् कल फिर बड़ी प्रसन्नता से आपकी राम-कहानी सुनने को तैयार हो जायगा। पर हम तो पहले ‘अपने’ ही को सोचते हैं, अपने ‘स्वार्थ’ को ही सर्वोपरि रखते हैं। इससे न हमारा ही स्वार्थ पूरा होता है और न परमार्थ ही हो पाता है।

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